*चित्रकूट।*
नगर परिषद् चित्रकूट इन दिनों घूसखोरी, भ्रष्टाचार और बेलगाम अतिक्रमण का गढ़ बनती जा रही है। स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि जब तक नगर परिषद् में जमे घूसखोर व भ्रष्ट स्थानीय कर्मचारियों का स्थानांतरण नहीं किया जाता और अतिक्रमण माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक हालात सुधरने वाले नहीं हैं।
शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर गलियों और सार्वजनिक स्थलों तक अवैध अतिक्रमण फैला हुआ है, जिससे यातायात बाधित है और आम जनता त्रस्त है। आरोप है कि नगर परिषद् के कुछ कर्मचारी अतिक्रमणकारियों से मिलीभगत कर आंख मूंदे बैठे हैं और मोटी रिश्वत लेकर अवैध कब्जों को संरक्षण दे रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद् की निष्क्रियता और भ्रष्ट तंत्र के चलते विकास कार्य ठप पड़े हैं। शिकायतों के बावजूद न तो दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है और न ही अतिक्रमण हटाने की कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है।
आक्रोशित नागरिकों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भ्रष्ट कर्मचारियों को हटाकर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान नहीं चलाया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागेंगे या नगर परिषद् चित्रकूट यूं ही भ्रष्टाचार और अतिक्रमण की भेंट चढ़ती रहेगी?







